अमरनाथ यात्रा 2026: गृह मंत्री अमित शाह की हाई-लेवल बैठक; सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम, रूट 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित

Amarnath Yatra 2026: Home Minister Amit Shah holds high-level meeting; unprecedented security arrangements, route declared a 'No-Flying Zone'.

नई दिल्ली। आगामी अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक बेहद अहम और उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। कश्मीर हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित पवित्र गुफा मंदिर की यह वार्षिक तीर्थयात्रा आगामी 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। 57 दिनों तक चलने वाली इस पावन यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

गृह मंत्रालय में हुई इस मैराथन बैठक में देश के शीर्ष सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा ग्रिड को अभेद्य बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और खुफिया एजेंसियों के बीच रियल-टाइम तालमेल बिठाने पर जोर दिया गया। गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि सुरक्षा बलों की तैनाती, अत्याधुनिक निगरानी तकनीकों (ड्रोन और सैटेलाइट) और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को इस तरह तैयार रखा जाए कि श्रद्धालुओं को कम से कम बाधा का सामना करना पड़े। सुरक्षा कारणों और अमरनाथ श्राइन बोर्ड के नियमों के तहत सरकार ने इस बार कुछ कड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट घोषणा की है कि 'अमरनाथ यात्रा 2026' के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए हवाई मार्ग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यात्रा के दोनों प्रमुख रास्तों पहलगाम और बालटाल को 1 जुलाई से यात्रा के संपन्न होने तक पूरी तरह 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित कर दिया गया है। इस साल यात्रा क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए कोई वाणिज्यिक हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं होगी। पवित्र तीर्थस्थल के दर्शन की योजना बना रहे सभी भक्तों को सलाह दी गई है कि वे इस बदलाव को ध्यान में रखकर ही अपनी योजना बनाएं। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पैदल जाना होगा, या फिर वे पूरी यात्रा के दौरान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध टट्टू (घोड़े) और पालकी की पारंपरिक सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। जून से अगस्त के महीनों में कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों पर प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग (बाबा बर्फानी) की पूजा-अर्चना का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण चढ़ाई के बावजूद हर साल हजारों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं। गृह मंत्री अमित शाह की इस उच्च-स्तरीय समीक्षा के बाद साफ है कि मोदी सरकार ने 'सुरक्षा प्रथम' के संकल्प के साथ अमरनाथ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।