छात्र आंदोलन के समर्थन में कैबिनेट मंत्री विजयवर्गीय के घर पहुंचे दंपति गिरफ्तार,बिना अनुमति प्रदर्शन पड़ा भारी,भेजे गए जेल
इंदौर। छात्र आंदोलन के समर्थन में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे एक दंपति पर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। परदेशीपुरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दंपति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए प्रहलाद पाण्डेय और उनकी पत्नी संगीता पाण्डेय हाथों में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के घर के बाहर विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।
पुलिस प्रशासन को इस प्रदर्शन की भनक लगभग एक घंटे पहले ही लग गई थी। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर मंत्री निवास के आसपास सख्त घेराबंदी कर दी थी। पुलिस पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुए हैं। पांडेय दंपति ने इस विरोध प्रदर्शन को बड़ा रूप देने के लिए सोशल मीडिया पर कई संदेश प्रसारित किए थे। इतना ही नहीं, वे टंट्या भील चौराहे पर जारी विद्यार्थियों के आंदोलन में भी पहुंचे थे और वहां छात्रों से मंत्री निवास के घेराव में शामिल होने की अपील की थी। हालाँकि, तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति नहीं पहुंचा और दंपति को अकेले ही मंत्री निवास के बाहर विरोध दर्ज कराना पड़ा। इससे पहले दंपति ने छात्र आंदोलन के समर्थन में इंदौर सांसद शंकर लालवानी के घर के बाहर भी धरना दिया था। बुधवार दोपहर जब दंपति मंत्री निवास पहुंचे, तो वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने और रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद जब प्रहलाद पाण्डेय सड़क पर बैठकर विरोध जताने लगे, तब पुलिस बल ने उन्हें उठाकर अपनी गाड़ी में बैठाया। वहीं उनकी पत्नी संगीता को महिला पुलिस कर्मियों की मदद से थाने ले जाया गया। परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कानवा के अनुसार, बिना किसी पूर्व अनुमति के संवेदनशील क्षेत्र में प्रदर्शन करने और शांति व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप में दंपति के खिलाफ दंडात्मक कानूनी प्रावधानों के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने धारा 151 एवं बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन करने की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान दंपति ने माना कि उनसे नियम उल्लंघन की भूल हुई है। जेल भेजे जाने से पहले पांडेय दंपति ने पुलिस को बताया कि विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का यह कहना कि नीट परीक्षा घोटाला प्रदेश का विषय नहीं है', इसके बाद छात्र आंदोलन को 'प्रायोजित' बताना और छात्रों के संदर्भ में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करना इन सब बातों से युवाओं और उनके अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। इसी बयानबाजी के विरोध में वे अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।