श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम और मददगारों के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक और बड़ी और कठोर कार्रवाई की है। एनआईए ने श्रीनगर के हजरतबल इलाके के दनिहामा में स्थित एक रिहायशी मकान को पूरी तरह ज़ब्त कर लिया है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी नेटवर्क को सहायता देने के आरोपों की जांच के बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने श्रीनगर में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने हजरतबल क्षेत्र के दनिहामा गांव में स्थित गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ ‘मामा गैस’ के रिहायशी मकान को जब्त कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मकान का इस्तेमाल पाकिस्तान से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को छिपाने और उन्हें सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा था। इस कार्रवाई के साथ एजेंसी ने कथित आतंकवादी सहायता तंत्र और सीमा पार बैठे संचालकों के बीच संपर्कों की जांच तेज कर दी है। एनआईए के मुताबिक, दनिहामा गांव में खसरा संख्या 315 पर स्थित इस संपत्ति को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 25 के तहत जब्त किया गया है। एजेंसी ने बताया कि संपत्ति जब्ती की कार्रवाई महानिदेशक से मंजूरी मिलने के बाद की गई। जांचकर्ताओं का दावा है कि यह मकान आतंकियों को आश्रय देने के लिए इस्तेमाल किया गया था और इसका संबंध सीमा पार से संचालित कथित आतंकवादी साजिश से जुड़ता है। यह मामला एनआईए की प्राथमिकी संख्या आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू से जुड़ा है। इसकी शुरुआत 31 मार्च 2026 को श्रीनगर के जकूरा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 24/2026 से हुई थी, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी के अनुसार, 6 अप्रैल 2026 को गुलाम मोहम्मद मीर के मकान पर छापा मारा गया था। इस दौरान वहां दो संदिग्ध पाकिस्तानी लश्कर-ए-तैयबा आतंकियों अबू हुरैरा और खुबैब की मौजूदगी सामने आई थी। एजेंसी का दावा है कि छापे के दौरान विस्फोटक जैसी संदिग्ध सामग्री, कई डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामान भी बरामद किया गया था। इन वस्तुओं की जांच के आधार पर कथित नेटवर्क की गतिविधियों और उसके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। एनआईए की जांच में कथित तौर पर स्थानीय मददगारों और पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के संचालकों के बीच संपर्क होने की बात सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क पर आतंकियों की घुसपैठ में मदद करने, उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने, रहने की व्यवस्था करने और हथियारों सहित अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित तौर पर इस सहायता तंत्र का इस्तेमाल सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमलों की साजिश में किस तरह किया गया। मकान जब्त किए जाने की कार्रवाई को कथित आतंकवादी नेटवर्क की मदद करने वालों के खिलाफ जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अब एजेंसी का ध्यान इस मामले में अन्य संभावित मददगारों की पहचान करने, डिजिटल उपकरणों से जानकारी जुटाने और सीमा पार के संचालकों से संपर्क की कड़ियां जोड़ने पर है। हालांकि, गुलाम मोहम्मद मीर और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा। एनआईए की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।






