Oct 20, 2026 Login
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उत्तराखंड में विजयदशमी की धूम: रुद्रपुर के नवनिर्मित राम पार्क में सजे रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के विशालकाय पुतले,सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Vijayadashami celebrations in Uttarakhand: Giant effigies of Ravana, Kumbhakarna, and Meghnada set up at the newly constructed Ram Park in Rudrapur; stringent security arrangements in place.

रुद्रपुर। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पावन पर्व विजयदशमी (दशहरा) इस बार उत्तराखंड के शहरों में अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर पिछले एक महीने से चल रही तमाम तैयारियां अब पूरी कर ली गई हैं। रुद्रपुर में दशहरा उत्सव को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है, जहां इस बार 70 फीट ऊंचे रावण के विशालकाय पुतले आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

विजयदशमी पर्व धूमधाम से मनाने के लिए रुद्रपुर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दशहरे के अवसर पर शहर में रावण दहन को लेकर लोगों में उत्साह है। रुद्रपुर में इस बार 70 फीट ऊंचे रावण के साथ 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतले आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन विशालकाय पुतलों के दहन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन और नगर निगम ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। रुद्रपुर में दशहरा उत्सव का मुख्य आयोजन राम पार्क में किया जाएगा। पहले गांधी पार्क के नाम से पहचाने जाने वाले इस स्थल पर हर साल विजयदशमी के अवसर पर रावण दहन का आयोजन होता है। इस बार यहां 70 फीट ऊंचे रावण, 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। विशालकाय पुतलों को अंतिम रूप दिए जाने के साथ ही आयोजन स्थल पर तैयारियों को पूरा कर लिया गया है। रावण दहन के दौरान बुराई, अहंकार और अन्याय के अंत का संदेश दिया जाएगा। पर्व को लेकर शहर में उत्सव का माहौल है। परिवारों के साथ आयोजन देखने आने वाले लोगों की संभावित भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। 

रुद्रपुर के दशहरा आयोजन की सबसे खास बात यह है कि यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने का काम रामपुर का एक मुस्लिम परिवार वर्ष 1957 से करता आ रहा है। परिवार की कई पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। कारीगर दिलशाद और उनके परिवार के लिए यह काम केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनकी कला, मेहनत और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है। करीब सात दशक से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत की मिसाल पेश करती है। अलग-अलग समुदायों के लोग मिलकर त्योहारों की परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं। रुद्रपुर में पुतले बनाने वाले इस परिवार की भूमिका भी इसी साझी संस्कृति को उजागर करती है। हर साल की तरह इस बार भी परिवार ने विशाल पुतले तैयार कर आयोजन को खास बनाने में योगदान दिया है। दशहरा उत्सव के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात सुचारु रखने और रावण दहन के समय सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी। रुद्रपुर में नगर निगम और पुलिस ने आयोजन को व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां की हैं। विजयदशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि सत्य की असत्य पर और सदाचार की दुराचार पर विजय का प्रतीक है। रुड़की और रुद्रपुर में होने वाले आयोजनों के माध्यम से यही संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। विशाल पुतलों का दहन, उत्सव का माहौल और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं इस बार भी दशहरे को खास बनाएंगी।