भाजपा सरकार के ‘स्मार्ट सिटी’ का काला सचः चिल्लाता रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता और सोता रहा सिस्टम! चश्मदीद ने बदले बयान, क्या यही है नए भारत का न्याय?
नोएडा। यूपी के नोएडा में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है । 27 साल का युवराज, जो गुरुग्राम से नोएडा जा रहा था, अपनी एसयूवी के साथ सेक्टर 150 में एक 50 फीट गहरे पानी से भरे निर्माणाधीन गड्ढे में गिर गया। वह घंटों मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन भाजपा शासित उत्तर प्रदेश की सरकारी मशीनरी पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ सब सोते रहे। आखिरकार, वह डूबकर मर गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह हादसा था या फिर सरकारी लापरवाही की हत्या?
यह मामला खासा गरमाया हुआ है और सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। एक कन्स्ट्रकशन कंपनी ने बिना साइनबोर्ड, बिना बैरिकेडिंग के गड्ढा खोदा और नोएडा अथॉरिटी ने आंखें मूंद लीं। भाजपा सरकार के ‘स्मार्ट सिटी’ के दावे यहां पानी में डूब गए। युवराज कार से निकलकर मदद मांगता रहा, ‘बचाओ, बचाओ’ चिल्लाता रहा, लेकिन पुलिस को सूचना मिलने के बाद भी एसडीआरएफ की टीम घंटों लेट पहुंची। क्यों? क्योंकि सिस्टम व्यस्त था चाय पीने में, या शायद राजनीतिक रैलियों में। क्या एसडीआरएफ का मतलब अब 'Slow Disaster Response Force' हो गया है? और पुलिस वे तो हमेशा की तरह, बाद में आकर रिपोर्ट लिखने में माहिर हैं। इस मामले में एनजीटी ने खुद संज्ञान लिया है। कहते हैं, अधिकारियों की घोर लापरवाही से मौत हुई। लेकिन क्या होगा? कुछ गिरफ्तारियां, प्लॉट ओनर्स की और बस हो गया। भाजपा सरकार के मंत्री भाषण देंगे, हम जांच कराएंगे।
हैरानी की बात तो ये है कि चश्मदीद गवाह भी अब बयान बदल रहे हैं। चश्मदीद ने शुरू में कहा कि हमने पुलिस को कॉल किया, लेकिन कोई नहीं आया। अब दबाव में बयान बदल रहे हैं, हमें कुछ नहीं पता। क्यों? क्योंकि सरकारी तंत्र नहीं चाहता कि सच बाहर आए। पुलिस का दबाव, धमकियां!यही है नए भारत का न्याय। युवराज के पिता ने कहा कि मेरा बेटा घंटों जिंदा था, मदद मांगता रहा। अगर समय पर रेस्क्यू किया जाता, तो बच जाता। लेकिन सरकार ने हमें धोखा दिया। यह सिर्फ युवराज की मौत नहीं, पूरे सिस्टम की मौत है। भाजपा सरकार, पुलिस, एसडीआरएफ की लापरवाही से कितनी और जानें जाएंगी, जनता पूछ रही है? स्मार्ट सिटी कब बनेगी, या सिर्फ स्लोगन ही रहेंगे? जांच हो, दोषियों को सजा मिले।