मिडिल ईस्ट तनावः बढ़ता जा रहा जंग का दायरा! रियाद पर मिसाइल अटैक, सऊदी अरब ने दी चेतावनी! तो क्या जंग में कूदेगा पाकिस्तान?

Middle East tensions: The scope of war is expanding! Missile attack on Riyadh, Saudi Arabia issues warning! So will Pakistan jump into the fray?

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट तनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जंग का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। इस बीच ईरान की आक्रामकता ने दुनिया की टेंशन और बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। इसके बाद बौखलाए सऊदी ने चेतावनी दी है कि वो अब सीधे सैन्य कार्रवाई में उतर सकता है। ऐसे में इस बात की आशंका बढ़ गई है कि यदि सऊदी अरब युद्ध में उतरता है, तो पाकिस्तान को भी शामिल होना पड़ेगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच मौजूद रक्षा समझौता उसको इसके लिए मजबूर कर सकता है। बुधवार को तुर्की, यूएई, कतर समेत एक दर्जन देशों के विदेश मंत्री रियाद के एक होटल में जुटे थे। वे मध्य-पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान ईरान ने रियाद को मिसाइलों से निशाना बना दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। अब तक रियाद को अपेक्षाकृत सुरक्षित शहर माना जाता था। ईरान के हमले ने कई धारणाएं तोड़ दी हैं। इससे साफ है कि युद्ध अब सऊदी अरब के प्रशासनिक केंद्र तक पहुंच चुका है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब जवाबी कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा समझौते को सक्रिय कर सकता है। 

खाड़ी के तेल कुओं में हाहाकार मचाने के बाद भी ईरान हमलावर
इधर गल्फ देशों की तेल रिफाइनरियों पर ताबड़तोड़ हमले के बाद भी ईरान रुकने के संकेत नहीं दे रहा है। ईरान ने कहा कि हमारे गैस फील्ड पर जो हमला हुआ है उसका बदला अभी पूरा नहीं हुआ है। ईरान के रूख से साफ संदेश मिल रहा है कि खाड़ी देशों में एनर्जी केंद्रों पर आने वाले दिनों में भी हमले जारी रह सकते हैं। ईरान के सशस्त्र बलों की संयुक्त कमान के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए इजरायली हमले का जवाब अभी खत्म नहीं हुआ है। सशस्त्र बलों की संयुक्त कमान के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि इस तरह के हमलों की अगर रिपीट किया गया तो ईरान ‘कहीं अधिक जोरदार जवाबी कार्रवाई’ को अंजाम देगा। ईरान ने कहा कि उसके जवाब में दुश्मन के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ उनके सहयोगियों के बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जाएगा।