कानपुर गैंगरेप केसः पत्रकार और पुलिसकर्मी की शर्मनाक करतूत! दो घंटे तक दरोगा की कार के अंदर से चिल्लाती रही नाबालिग, आबरू लूटते रहे दरिंदे

 Kanpur gang rape case: Journalist and police officer's shameful act! Minor girl screamed from inside the police officer's car for two hours while the rapists continued to rape her.

कानपुर। यूपी के कानपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, यहां सचेंडी इलाके में 14 साल की एक नाबालिग के साथ हैवानियत की हदें पार की गईं। इस सनसनीखेज वारदात में एक स्थानीय कथित पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आरोपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर फिलहाल फरार है। इस मामले में पुलिस प्रशासन ने सख्त कार्रवाई भी है। मामले की जांच के लिए 4 टीमों का गठन किया गया है। घटना सचेंडी थाना क्षेत्र की है। पीड़िता के मुताबिक रविवार रात करीब 10 बजे वह घर से बाहर निकली थी। उसी दौरान एक काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी उसके पास आकर रुकी और गाड़ी में सवार दो युवकों ने अचानक उसे दबोच लिया और जबरन कार के अंदर खींच लिया। जबतक पीड़िता कुछ समझ पाती, उससे पहले ही गाड़ी तेज रफ्तार में अंधेरे की ओर बढ़ गई। आरोप है कि कार सवार युवक उसे सचेंडी इलाके में रेलवे ट्रैक के पास स्थित एक सुनसान स्थान पर ले गए, वहां गाड़ी को खड़ा कर दिया गया। कार के शीशे बंद थे, बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था। पीड़िता का आरोप है कि करीब दो घंटे तक कार के अंदर उसके साथ दरिंदगी की गई। वह मदद के लिए चिल्लाती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन बंद शीशों और सुनसान इलाके के कारण उसकी चीखें बाहर तक नहीं पहुंच सकीं। दो घंटे तक वह हर पल मौत से जूझती रही। 

खाकी हुई शर्मशार, रक्षक ही बना भक्षक
आरोप है कि इस वारदात में भीमसेन चौकी प्रभारी दरोगा अमित मौर्या की सीधी भूमिका रही। जांच में सामने आया है कि स्कॉर्पियो गाड़ी दरोगा की ही थी और उसी में नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया। आरोप है कि दरोगा ने शिवबरन नाम के एक कथित पत्रकार के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद जब पीड़िता की हालत बेहद खराब हो गई और वह पूरी तरह टूट चुकी थी, तब आरोपी उसे देर रात उसके घर के पास छोड़कर फरार हो गए। किसी तरह हिम्मत जुटाकर वह घर पहुंची और परिजनों को आपबीती सुनाई। परिवार पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा। पीड़िता के भाई ने बिना देरी किए डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। 

शुरू में टाल मटोल करती रही लड़की 
आरोप है कि पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता व उसके भाई को भीमसेन चौकी ले जाया गया, लेकिन शुरुआती स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। पीड़िता नाबालिग होने के बावजूद तत्काल पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि क्योंकि मामले में एक पुलिसकर्मी का नाम सामने आ रहा था, इसलिए कार्रवाई में जानबूझकर देरी की गई। जब यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, तब जाकर सचेंडी थाने में एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि इसमें भी पीड़िता पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एफआईआर में नामजद आरोपियों के बजाय दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं लगाई गईं।