बुंदेलखंड का एपस्टीन जैसा कांडः 34 बच्चे, 47 देश और गंदे वीडियो! यूपी में मासूमों से दरिंदगी करने वाले राक्षस पति-पत्नी को सजा-ए-मौत, कहानी सुनकर कांप जायेगी रूह
बांदा। यूपी के बुंदेलखण्ड में 34 बच्चों के यौन शोषण और पॉर्न वीडियो, अश्लील फोटो बनाने के मामले में शुक्रवार को बांदा कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई। करीब पांच साल पुराने मामले में रामभवन पर 6.45 लाख और दुर्गावती पर 5.40 लाख का जुर्माना भी लगाया गया। इंटरपोल की सूचना पर सीबीआई ने इसकी रिपोर्ट दर्ज की थी। रामभवन के खिलाफ केस दर्जकर छानबीन करने वाली सीबीआई टीम ने जब सुरागों की कड़ियां जोड़नी शुरू की तो टीम के सदस्य भी हैरान रह गए। यह पूरा मामला इन दिनों में चर्चा में आए एपस्टीन कांड जैसा था। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक शातिर रामभवन ने ब्राजील, अमेरिका, चीन, अफगानिस्तान समेत करीब 47 देशों में बुंदेलखंड के बच्चों के पॉर्न वीडियो बेचे। एक पॉर्न वीडियो डार्क वेब पर अपलोड करने पर उसे लाखों रुपये मिलते थे। 34 बच्चों के 79 वीडियो बनाकर जेई ने बेचे। इससे उसने करोड़ों रुपयों की कमाई की। इसमें उसकी पत्नी दुर्गावती बराबर साथ देती रही। करीब 10 सालों तक यह सिलसिला चलता रहा, पर पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। बच्चों के यौन शोषण और पॉर्न वीडियो बनाकर बेचे जाने का मामला इंटरपोल के सामने आया। इंटरपोल ने 17 अक्तूबर 2020 को मामले की जानकारी सीबीआई से शेयर की थी। इंटरपोल की ओर से एक पेन ड्राइव भेजा गया। इसमें 34 बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और 679 फोटो थे। सीबीआई ने जांच के बाद नई दिल्ली में 31 अक्तूबर 2020 को केस दर्ज कराया। सीबीआई को पुख्ता जानकारी मिली थी कि बांदा के नरैनी में जवाहर नगर मोहल्ला निवासी चुन्ना प्रसाद कुशवाहा का पुत्र जेई रामभवन कुछ लोगों के साथ बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के बच्चों का यौन शोषण कर रहा है। सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। सीबीआई ने जांच के क्रम में बुंदेलखंड और उससे बाहर रामभवन का नेटवर्क खंगालने की कोशिश की। हालांकि सीबीआई को इस मामले में कोई सुराग नहीं मिला। पहले माना जा रहा था कि इस धंधे में कुछ हाई प्रोफाइल चेहरे सामने आ सकते हैं। लेकिन मामले में सीबीआई ने रामभवन और उसकी पत्नी पर ही चार्जशीट फाइल की।
चार्जशीट, 74 गवाह और 160 पेज में कोर्ट का फैसला
फरवरी 2021 में चार्जशीट दाखिल की और 74 गवाह पेश किए! सीबीआई ने जेई रामभवन और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर किया था। अब अदालत ने 160 पेज के फैसले में फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों को तब तक फांसी पर लटकाए रखा जाए, जब तक इनकी मौत न हो जाए। इसी के साथ प्रदेश सरकार को आदेश दिया गया है कि पीड़ितों को दस-दस लाख का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हर पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
बच्चों के दर्द देख कांपे डॉक्टर
कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि रामभवन की हैवानियत ने बच्चों को अंदर तक हिला दिया। किसी बच्चे की आंख घूम गई तो किसी के नाजुक अंग क्षतिग्रस्त हो गए। दिल्ली एम्स में बच्चों का इलाज चला। इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कोर्ट में गवाही भी दी। यह फैसले का आधार बनी। बच्चों के साथ दरिंदगी देख डॉक्टर भी विचलित हो गए थे। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रताड़ना के कारण कई बच्चों का पूरा जीवन नरक हो गया है।
बच्चों को ऐसे फंसाता था जेई
जेई रामभवन बच्चों को मोबाइल से फंसाता था। सीबीआई के शिकंजे में आए रामभवन की कोई संतान नहीं थी। इसके बाद भी वह घर पर बच्चों के लिए अलग मोबाइल रखता था। आस-पड़ोस के बच्चों ने इसकी पुष्टि भी की थी। एक बच्चे ने जेई के घर जाकर कुछ देर यूट्यूब चलाने की बात स्वीकार की थी। जेई ने अपनी काली करतूतों को इस सफाई से अंजाम दिया कि वर्षों तक इसकी भनक नहीं लगी। रामभवन की गिरफ्तारी के समय चित्रकूट तत्कालीन एसपी अंकित मित्तल ने कहा था कि पुलिस के संज्ञान में उसके खिलाफ इस तरह की कोई शिकायत पहले कभी नहीं आई। रामभवन मूलरूप से खरौंच के देविनका पुरवा का रहने वाला है। वह कर्वी में किराए के मकान में और उसके दोनों भाई राजा और रामप्रकाश नरैनी अतर्रा रोड के मकान में रहते थे। जेई रामभवन अपने सरल व्यवहार के जरिए अपनी काली करतूतों को छिपाता था। उसके ऑफिस के लोग भी उसे एक सहज-सरल व्यक्ति मानते थे। वह इतनी विनम्रता के साथ लोगों से मिलता था कि ऐसे घिनौने कृत्य के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता था।