सीजेपी विरोध प्रदर्शन के बीच नई पीढ़ी पर आरएसएस  प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा संदेश! बोले-आज का युवा सवाल पूछता है,उन्हें तर्क से समझाना होगा

Amidst protests, RSS chief Mohan Bhagwat delivers a significant message regarding the new generation: Today's youth ask questions; they must be reasoned with.

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और युवाओं के जारी विरोध-प्रदर्शनों के माहौल के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नई पीढ़ी की सोच, पारिवारिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया है। दिल्ली में 'विश्व मंगलम् सभा' द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'युगानुकूल मातृत्व' कार्यक्रम (23-24 जुलाई) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि आज की पीढ़ी केवल अंधानुकरण या आज्ञा का पालन नहीं करती, बल्कि वह सवाल पूछती है और हर विषय के पीछे का तर्क जानना चाहती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नई पीढ़ी की बदलती सोच, परिवार व्यवस्था और भारतीय संस्कृति को लेकर बड़ा संदेश दिया है। दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय 'विश्व मंगलम् सभा' के समापन सत्र में उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी पहले की तरह केवल आदेश नहीं मानती, बल्कि हर बात पर सवाल करती है और उसका तर्क जानना चाहती है। ऐसे में अभिभावकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को समय दें, उनसे निरंतर संवाद करें और धैर्यपूर्वक उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करें। युगानुकूल मातृत्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि समय के साथ बच्चों की अपेक्षाएं बदल चुकी हैं। पहले माता-पिता की बात बिना किसी सवाल के मान ली जाती थी, लेकिन आज के बच्चे हर निर्णय के पीछे कारण जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वाभाविक है और इसे स्वीकार करते हुए परिवारों को संवाद की संस्कृति को मजबूत करना होगा। भागवत ने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय माता-पिता के प्रति श्रद्धा और विश्वास इतना गहरा था कि उनकी बात अंतिम मानी जाती थी। लेकिन आज की पीढ़ी अधिक जिज्ञासु, तार्किक और आत्मविश्वासी है। इसलिए केवल निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि बच्चों को समझाना होगा कि किसी निर्णय या परंपरा का महत्व क्या है। उन्होंने कहा कि परिवारों में बातचीत कम होती जा रही है, जिसका असर रिश्तों पर पड़ रहा है। यदि माता-पिता बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें तो परिवार और अधिक मजबूत बन सकते हैं। अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन के लंबे दौर में भारतीय समाज के मन में यह धारणा बैठा दी गई कि उसकी अपनी परंपराएं और ज्ञान प्रणाली पिछड़ी हुई हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत की सांस्कृतिक नींव बेहद मजबूत है और उसका आधार हजारों वर्षों के अनुभव और जीवन मूल्यों पर टिका है। उन्होंने लोगों से बिना सोचे-समझे पश्चिमी जीवनशैली अपनाने के बजाय अपनी सांस्कृतिक विरासत पर विश्वास रखने का आग्रह किया। मोहन भागवत ने मातृत्व को समाज और मानव सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि मातृत्व के बिना सृष्टि का निर्माण, पालन-पोषण और निरंतरता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में विवाह, परिवार और मातृत्व जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जो अत्यधिक व्यक्तिवाद का परिणाम है। उनका दावा था कि जिन समाजों ने इस सोच को अपनाया, वे अब स्वयं इन अवधारणाओं पर पुनर्विचार कर रहे हैं। उन्होंने विज्ञान और भारतीय परंपराओं के संबंध पर भी अपने विचार रखे। भागवत ने कहा कि एक समय ऐसा माना जाता था कि विज्ञान हर प्रश्न का उत्तर दे सकता है, लेकिन आज स्वयं वैज्ञानिक भी विज्ञान की सीमाओं को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराएं केवल आस्था पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव, जीवन मूल्यों और समाज की आवश्यकताओं पर आधारित हैं। अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि यदि परिवारों में प्रेम, विश्वास और संवाद की संस्कृति मजबूत होगी तो नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहेगी। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं, उनकी बात सुनें और हर प्रश्न का धैर्यपूर्वक उत्तर दें। उनके अनुसार यही स्वस्थ परिवार, मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।