नीट यूजी 2026 में बिहार के लाल का कमाल: आयुष भालोटिया बने स्टेट टॉपर,ऑल इंडिया रैंक-4 के साथ रचा इतिहास,टॉप-138 में राज्य के 4 धुरंधर

A Bihar native shines in NEET UG 2026: Ayush Bhalotia becomes the state topper and makes history by securing All India Rank 4; four top performers from the state feature in the top 138.

पटना। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इस बार के नतीजों ने साफ कर दिया है कि बिहार के मेधावी छात्रों का जलवा राष्ट्रीय पटल पर लगातार बरकरार है। नवादा जिले के वारिसलीगंज के रहने वाले आयुष भालोटिया ने ऑल इंडिया रैंक-4  हासिल कर पूरे राज्य का नाम रोशन किया है। वह बिहार के स्टेट टॉपर बने हैं। इस साल की परीक्षा की सबसे खास बात यह रही कि देश भर में किसी भी अभ्यर्थी को 720 में से 720 अंकों का परफेक्ट स्कोर नहीं मिला, जिससे परीक्षा के कठिन स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बावजूद बिहार के चार होनहारों ने देश के टॉप-138 अभ्यर्थियों की संभ्रांत सूची में अपनी जगह पक्की की है।

देश में चौथा स्थान पाने वाले आयुष भालोटिया ने 720 में से शानदार 710 अंक अर्जित किए हैं। अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए आयुष ने कहा मैंने रोजाना 5 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी और 6 घंटे की नियमित क्लास पर पूरा ध्यान दिया। पढ़ाई में निरंतरता, लगातार मेहनत और सही रणनीति से ही मुझे यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल हुई है। बिहार की ही मेधावी छात्रा रिया रंजन ने ऑल इंडिया रैंक-6 (AIR 6) हासिल कर यह साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी मायने में पीछे नहीं हैं। इसके अलावा राज्य के रविकांत दीघवार ने 55वीं रैंक और आदित्य कुमार ने 73वीं रैंक हासिल कर अपनी मेधा का परचम लहराया है। इन चारों छात्रों ने 690 से अधिक अंक हासिल कर टॉप-138 में जगह बनाई है। राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों की बात करें तो इस बार टॉप-138 में करीब 58 प्रतिशत छात्राएं और 42 प्रतिशत छात्र शामिल हैं, जो यह साफ दर्शाता है कि इस वर्ष की मेरिट सूची में बेटियों ने मजबूत बढ़त बनाई है। वहीं, पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पंशुल बंसल ने 715 अंकों के साथ संयुक्त रूप से ऑल इंडिया टॉप किया है। नीट विशेषज्ञ और प्रख्यात शिक्षाविद आशुतोष झा का कहना है कि इस बार के परिणाम एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। देश के टॉप-138 अभ्यर्थी किसी एक या दो बड़े हब से नहीं, बल्कि 66 अलग-अलग शहरों से ताल्लुक रखते हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता कुछ चुनिंदा महानगरों तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे शहरों और ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं। बिहार के नवादा जैसे जिले से आयुष की सफलता इसी बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। इस वर्ष 700 से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की संख्या महज 19 रही है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। शिक्षाविदों के अनुसार, उच्च अंक हासिल करना इस बार पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। परिणाम जारी होने के साथ ही देश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए काउंसलिंग का रास्ता साफ हो गया है। ऑल इंडिया कोटा (15%) और राज्य कोटा (85%) के तहत जल्द ही पंजीकरण शुरू होगा, जहां बिहार के ये सफल अभ्यर्थी अपनी रैंक के आधार पर देश और राज्य के शीर्ष सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए अपनी प्राथमिकताएं भरेंगे।