आस्थाः संतान प्राप्ति के लिए उत्तराखंड के कोट भ्रामरी मंदिर में महिलाएं कर रही कठिन तप! नवरात्रि में होती है विशेष पूजा, जानें क्या है मान्यता

 Faith: Women are performing rigorous penance in Kot Bhramari temple of Uttarakhand to get children! Special worship is done during Navratri, know what is the belief

बागेश्वर। कोट भ्रामरी मंदिर क्षेत्रवासियों के साथ-साथ देश-विदेश के श्रद्धालुओं का अगाध श्रद्धा का केंद्र है। यह कत्यूर घाटी की कुल देवी मानी जाती है। बागेश्वर जिला मुख्यालय से 25 किमी की दूरी पर गरुड़ के ऊंचाई में कोट मंदिर स्थित है। इसे रणचूला कोट भी कहते हैं। कोट भ्रामरी मंदिर की खास विशेषता यह है कि यहां वर्षभर में दो बार मेला लगता है, चैत्र मास के नवरात्रों में यहां निःसंतान महिलाएं रातभर हाथ में दिया रखकर प्रार्थना करती हैं। उन्हें मां की कृपा से अवश्य संतान की प्राप्ति होती है। चैत्र मास की नवरात्रियों में सप्तमी की रात्रि में निःसंतान महिलाएं हाथ में दीया लेकर कोट भ्रामरी मैय्या से संतान की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि जो महिला सच्चे मन से प्रार्थना करती है उसे सालभर में अवश्य संतान की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जो भी निःसन्तान महिला सूरज ढलने से लेकर सूरज उगने तक लगभग 14 घण्टे यहां दीया हाथ में लेकर खड़े रहते हैं और मैय्या का ध्यान करते हैं, तो उनको सन्तान की प्राप्ति अवसय होती है। मेलाडूंगरी निवासी जगदीश तिवारी की शादी के 17 साल तक संतान नही हुई, जिसके लिए वे मेडिकल इलाज को लेकर कई अस्पतालों के चक्कर काट कर जब थक गए। तो तब उनकी पत्नी ने माता कोट भ्रामरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर दीया जला कर रात भर पूजा अर्चना की और संतान प्राप्ति की प्रार्थना की। फिर जगदीश तिवारी बताते हैं कि माता रानी का आशीर्वाद हमें प्राप्त हुआ। हमें शादी के 17 साल बाद पुत्र रत्न प्राप्त हुआ। तब से जगदीश तिवारी की आस्था इस माता के दरबार से अधिक बढ़ गयी।