Oct 21, 2026 Login
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एक विवाह ऐसा भीः थाईलैंड की मोराया ने थामा उत्तराखंड के नवीन का हाथ! दुबई में दोस्ती से शुरू हुई प्रेम कहानी, कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के साथ लिए सात फेरे

A Unique Union: Moraya from Thailand ties the knot with Naveen from Uttarakhand! Their love story, which began as a friendship in Dubai, culminated in a wedding ceremony held according to traditional

हल्द्वानी। कहते हैं कि प्यार की कोई सरहद नहीं होती। जब दो दिल एक-दूसरे के करीब आते हैं, तो भाषा, देश और संस्कृति की दूरियां भी रिश्ते के आड़े नहीं आतीं। उत्तराखंड के हल्द्वानी में दशहरा पर्व पर हुई एक शादी ने इस बात को खूबसूरती से साबित किया। यहां थाईलैंड की युवती मोराया ने बागेश्वर जिले के उडल गांव निवासी नवीन परिहार के साथ विवाह कर नई जिंदगी की शुरुआत की। खास बात यह रही कि दोनों ने एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान करते हुए कुमाऊंनी रीति-रिवाजों के अनुसार सात फेरे लिए। दो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से जुड़े मोराया और नवीन की प्रेम कहानी की शुरुआत दुबई में हुई थी। करीब तीन साल पहले रोजगार के सिलसिले में दुबई पहुंचे नवीन की मुलाकात थाईलैंड की रहने वाली मोराया से हुई। शुरुआती मुलाकातों से दोनों के बीच दोस्ती का रिश्ता बना। समय के साथ यह दोस्ती प्यार में बदल गई और दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया। इसके बाद परिवारों की सहमति और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए विवाह की तैयारियां शुरू हुईं। नवीन के परिजनों के अनुसार, उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बागेश्वर में पूरी की थी। इसके बाद हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और रोजगार के लिए दुबई चले गए।

नवीन का पैतृक गांव उडल दूरस्थ क्षेत्र में होने और परिवार के सदस्यों के साथ विदेश से आए मेहमानों की सुविधा को देखते हुए विवाह के लिए हल्द्वानी के देवलचौड़ स्थित उनकी बहन के घर को चुना गया। 19 अक्टूबर को घर पर विवाह से जुड़ी पारिवारिक रस्में निभाई गईं। इसके बाद 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर कुमाऊंनी पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न कराया। इस दौरान परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने नवदंपती को नए जीवन की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। विवाह समारोह में सबसे खास बात दोनों की अलग-अलग भाषाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के बावजूद रस्मों में उनकी भागीदारी रही। कुमाऊंनी विवाह की परंपराएं मोराया के लिए नई थीं, लेकिन उन्होंने उन्हें समझने और निभाने में खास उत्साह दिखाया। विवाह की रस्मों का अर्थ समझाने के लिए अंग्रेजी ट्रांसलेटर की मदद ली गई, ताकि वह हर परंपरा को समझकर उसमें हिस्सा ले सकें। इस शादी में थाईलैंड से पहुंचे मोराया के भाई और भाभी ने भी कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार कन्यादान की रस्म निभाई। इससे विवाह समारोह में दोनों संस्कृतियों का सुंदर संगम देखने को मिला। दशहरे के शुभ अवसर पर सात फेरों के साथ नवीन और मोराया ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने का संकल्प लिया। हल्द्वानी में संपन्न यह विवाह सिर्फ दो लोगों के मिलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आपसी विश्वास, प्रेम और सांस्कृतिक सम्मान की मिसाल भी पेश की।