Oct 29, 2026 Login
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केरल में 113 दिन से सड़क पर शिक्षक अभ्यर्थी, महिला ने मुंडवाया सिर… फिर भी सरकार नहीं जागी, सोशल मीडिया के चर्चित चेहरे भी खामोश!

Teacher candidates have been on the streets in Kerala for 113 days, a woman has shaved her head… yet the government remains silent, even popular social media figures remain silent!

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में सरकारी नौकरी की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों का संघर्ष अब और तेज हो गया है। लोक सेवा आयोग (PSC) की रैंक लिस्ट में जगह बनाने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज अभ्यर्थी पिछले 113 दिनों से राज्य सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। लंबा इंतजार, सरकारी आश्वासन और नियुक्तियों पर ठोस फैसले की मांग के बीच आंदोलन ने 26 अक्टूबर को उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब ऑल केरल लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) रैंक होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने सार्वजनिक रूप से अपना सिर मुंडवाकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया।

 

आंखों में आंसू और चेहरे पर नाराजगी के साथ वलारमथी का सिर मुंडवाना केवल प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की हताशा का भी संकेत है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परीक्षा पास करने और रैंक लिस्ट में स्थान हासिल करने के बाद भी नौकरी के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब वे मौखिक आश्वासनों के बजाय लिखित आदेश और नियुक्तियों पर स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, 30 सितंबर को शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में उनकी मांगों पर सहमति बनने और प्रदर्शन वापस लेने के बाद लिखित आदेश जारी करने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बाद में सरकार ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए फैसले को लेकर आनाकानी शुरू कर दी। उनका दावा है कि मंत्री के साथ बातचीत में मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया गया, लेकिन उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिला। इससे आंदोलनकारियों की नाराजगी और बढ़ गई।

प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगने की बात भी कह रहे हैं। उनका आरोप है कि कई कोशिशों के बावजूद उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर नहीं मिला। अभ्यर्थियों का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए नियुक्तियों के मुद्दे पर भरोसा दिलाने वाले नेताओं से अब सत्ता में आने के बाद ठोस कार्रवाई की अपेक्षा थी, लेकिन उनकी मांगें अब भी लंबित हैं।

आंदोलन की एक और तस्वीर भी सवाल खड़े करती है। 113 दिनों से जारी इस प्रदर्शन और एक महिला के सिर मुंडवाकर आमरण अनशन शुरू करने जैसे कदम के बावजूद, इस मुद्दे पर नेहा बोरा, ध्रुव राठी और CJP की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इन नामों से प्रतिक्रिया की अपेक्षा रखने वालों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि दूसरे आंदोलनों और मुद्दों पर आवाज उठाने वाले चर्चित चेहरे केरल के इन शिक्षक अभ्यर्थियों के संघर्ष पर खामोश क्यों हैं। हालांकि, इनकी चुप्पी के पीछे की वजह के बारे में कोई निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।

प्रदर्शनकारियों ने धरनास्थल पर बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन उन्हें धूप और बारिश से बचने के लिए टेंट या शेड लगाने की अनुमति नहीं दे रहा। वलारमथी ने भी बारिश के दौरान प्रदर्शनकारियों को शेड लगाने से रोके जाने की शिकायत की है। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें खराब मौसम के बीच भी खुले आसमान के नीचे बैठकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

शिक्षक अभ्यर्थियों की चार प्रमुख मांगें हैं। पहली, छात्र-शिक्षक अनुपात को मौजूदा 1:30 से घटाकर 1:25 किया जाए, ताकि अधिक शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता खुल सके। दूसरी, एडेड स्कूलों में शिक्षक नियुक्तियों को केरल लोक सेवा आयोग के दायरे में लाकर भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। तीसरी, मौजूदा PSC रैंक लिस्ट की वैधता बढ़ाई जाए और सूची में शामिल योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिले। चौथी, जिन जिलों में लंबे समय से नियुक्तियां नहीं हुई हैं, वहां रिक्त पदों को जल्द भरा जाए और नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पहले मौजूदा रैंक लिस्ट के अभ्यर्थियों के दावे पर फैसला लिया जाए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरकारी आश्वासनों को अमल में लाने का भी सवाल है। 113 दिन के धरने के बाद सिर मुंडवाने और आमरण अनशन का रास्ता चुनने वाले इन अभ्यर्थियों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस फैसला और लिखित आदेश सामने नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।