होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया रुख, गैर-दुश्मन जहाजों को दी सशर्त आवाजाही की अनुमति

Iran's New Stance on the Strait of Hormuz: Conditional Passage Granted to Non-Hostile Vessels

न्यूयॉर्क। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक अहम फैसला लेते हुए संयुक्त राष्ट्र को सूचित किया है कि गैर-दुश्मन जहाजों को अब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि इसके लिए संबंधित जहाजों को ईरानी अधिकारियों के साथ पूर्व समन्वय करना अनिवार्य होगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।

न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि केवल वे जहाज ही इस जलडमरूमध्य से गुजर सकेंगे, जो ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि में शामिल नहीं हैं और न ही ऐसे किसी प्रयास का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही जहाजों को सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े सभी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि “जो जहाज दुश्मन नहीं हैं, वे ईरान के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं।” इस घोषणा के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, ईरान की रक्षा परिषद ने भी इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा है कि अब इस रणनीतिक मार्ग से किसी भी गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज का गुजरना पूरी तरह से ईरानी प्रशासन की अनुमति और समन्वय पर निर्भर करेगा। सरकारी प्रसारक ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तेहरान, अमेरिका और इजराइल पर अपने क्षेत्र के खिलाफ सैन्य आक्रामकता का आरोप लगा रहा है। ईरान ने साथ ही कड़ी चेतावनी भी जारी की है। परिषद ने कहा कि देश के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर यदि आगे कोई हमला होता है तो उसका “तत्काल, निर्णायक और विनाशकारी” जवाब दिया जाएगा। इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने इस संघर्ष में बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और अब तेहरान समझौते के लिए तैयार है। हालांकि ईरान की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम एक ओर जहां वैश्विक आपूर्ति को सामान्य करने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा संतुलन को प्रभावित करने वाली रणनीति भी साबित हो सकता है।