सुलगता यूरोप: महंगाई और असंतोष की आग में झुलसते कई मुल्क! फ्रांस में कर्फ्यू तो इटली में सेना तैनात, ट्रंप बोले- जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा पेरिस! फिर सुर्खियों में आया मेलोनी का बुर्का बैन वाला फैसला
नई दिल्ली। यूरोप समेत दुनिया के कई प्रमुख देश इस समय गंभीर आंतरिक अशांति और हिंसक विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा संकट, भ्रष्टाचार और सरकारी आर्थिक नीतियों के खिलाफ भड़का जन-आक्रोश अब बेकाबू दंगों में तब्दील हो चुका है। फ्रांस, इटली, स्पेन, बेल्जियम, अल्बानिया, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे 7 देशों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सबसे विकट स्थिति फ्रांस और इटली में देखने को मिल रही है, जहां सड़कों पर आगजनी, बड़े पैमाने पर लूटपाट और पुलिस पर हमलों के बाद सरकारों को आपातकालीन कदम उठाने पड़े हैं।
फ्रांस में हालात बेकाबू: 2,500 गिरफ्तार, कर्फ्यू की तैयारी
फ्रांस में 'जेन-जी' (Gen-Z) युवाओं द्वारा महंगाई के खिलाफ शुरू किया गया आंदोलन अब अराजकता का रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस, लिली, नीस समेत कई प्रमुख शहरों में हिंसक झड़पों के बाद सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी और संवेदनशील इलाकों में स्थानीय कर्फ्यू लगाया जा रहा है। अब तक 2,500 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक कहा है कि सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से ही हर पाई की भरपाई कराई जाएगी। खुफिया विफलता और सुरक्षा में चूक के आरोपों के बीच गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसे राष्ट्रपति मैक्रों ने संकट की घड़ी में अस्वीकार करते हुए पुलिस बल को नई रणनीतियों के साथ सड़कों पर डटने का निर्देश दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का तीखा हमला: 'पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा'
फ्रांस की मौजूदा स्थिति पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखा बयान देकर वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। व्हाइट हाउस के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ट्रंप ने इसके लिए फ्रांस की इमिग्रेशन नीति को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने कहा, "मैंने बहुत पहले अपने दोस्त मैक्रों को चेताया था कि दुनिया भर से बेरोकटोक लोगों को आने देना एक बड़ी ऐतिहासिक भूल है। अनियंत्रित प्रवासियों के चलते शहर की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफिक्स) पूरी तरह बदल चुकी है। अगर यही हाल रहा तो पेरिस बहुत जल्द एक मुस्लिम शहर में तब्दील हो जाएगा।" ट्रंप के इस बयान ने फ्रांस की आंतरिक राजनीति और सुरक्षा विफलता पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ा दिया है।
इटली में मेलोनी सरकार का कड़ा प्रहार: सेना की तैनाती और 5 साल की जेल
इटली के मिलान शहर में दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और सोशल मीडिया पर हिंसा के वीडियो बनाकर सनसनी फैलाने की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उपद्रवियों पर कड़ा प्रहार किया है। मेलोनी सरकार ने मंगलवार को कड़े सुरक्षा नियमों को मंजूरी है। जिसके तहत हिंसक प्रदर्शनकारियों को अब 5 साल तक की जेल और करीब 21 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना होगा। चेहरा ढककर हिंसा करने पर सजा और कड़ी होगी। यदि कोई नाबालिग संपत्तियों को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई सीधे उसके माता-पिता से वसूली जाएगी। वहीं नए नियमों के तहत 14 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को अपने कृत्यों के प्रति समझदार माना जाएगा और उन पर सामान्य प्रक्रिया के तहत केस चलेगा। इसी क्रम में सड़कों पर कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए मिलान में साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया गया है। बता दें कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सितंबर 2026 में स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाला एक अध्यादेश पारित किया था, अब तनाव के बीच ये फैसला खासा सुर्खियों में है। हालांकि इटली में जॉर्जिया मेलोनी की सरकार द्वारा बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध का बिल 8 अक्टूबर 2025 को संसद में पेश किया गया था। इसके बाद सितंबर 2026 में स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे ढकने पर रोक का नया अध्यादेश इसी वर्ष लाया गया है, जिसे 60 दिनों के भीतर संसद की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। नियमों का उल्लंघन करने पर 300 से लेकर 3,000 यूरो (या स्कूलों से जुड़े नियमों के तहत 1,000 यूरो तक) का जुर्माना तय किया गया है। फ्रांस पहला यूरोपीय देश था जिसने 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का पहनने पर पूरी तरह बैन लगाया था, इसके अलावा ऑस्ट्रिया, ट्यूनीशिया, तुर्की, श्रीलंका और स्विटजरलैंड सहित दुनिया भर के 20 से अधिक देशों में ऐसे बैन हैं।