सियाही हलचल:सतपाल महाराज के खिलाफ चौबट्टाखाल से हरक को उतार सकती है कांग्रेस

चौबट्टाखाल सीट से लड़ सकते हैं हरक सिंह ?

 

देहरादून। चौबट्टाखाल और टिहरी सीट पर कांग्रेस चौंकाने वाला फैसला कर सकती है। सूत्रों के अनुसार चौबट्टाखाल सीट पर पूर्व काबीना मंत्री हरक सिंह को उतारा जा सकता है। टिहरी सीट पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की खामोशी टूटने का इंतजार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस फिलहाल एक परिवार एक टिकट के फार्मूले पर सख्ती से आगे बढ़ रही है। कुछ समय पहले भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व काबीना मंत्री यशपाल और उनके बेटे संजीव आर्य के सिवाय किसी दूसरे परिवार को दो टिकट नहीं मिले हैं।

रणनीतिक रूप से उपयोगी साबित होने पर कांग्रेस एक परिवार से दो टिकट के फार्मूले पर पुनर्विचार भी कर सकती है। प्रदेश के नेता शुरू से कह रहे हैं कि यदि किसी व्यक्ति की जनता में स्वीकार्यता है तो उसे एक परिवार एक टिकट के फार्मूले से मुक्त रखा जा सकता है।  हालांकि इस पर अंतिम निर्णय हाईकमान के स्तर पर ही होना है। चौबट्टाखाल से भाजपा से काबीना मंत्री सतपाल महाराज मैदान में है। सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ कांग्रेस के पास फिलहाल कोई बड़ा चेहरा नहीं है।

हरक का इस सीट पर दखल है। यदि उन्हे टिकट मिलता है तो वो मजबूत कैंडीडेट तो होंगे ही, साथ ही अपनी बहु अनुकृति की सीट लैंसडौन और चौबट्टाखाल दोनों पर फोकस कर सकते हैं।  इधर, टिहरी पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की वजह से निर्णय रुका हुआ है। न केवल कांग्रेस  बल्कि ने भी इस सीट पर अब तक प्रत्याशी तय नहीं किया है।

कांग्रेस की दूसरी लिस्ट जहां कई नए नेताओं के लिए सुकून भरी बयार लेकर आई वहीं, कुछ नेताओं के लिए तपती लू से कम नहीं है। सबसे बड़ा झटका पूर्व काबीना मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को लगा है। दुर्गापाल वर्ष 2012-17 की कांग्रेस सरकार के सहयोगी पीडीएफ के प्रमुख सदस्य थे। वर्ष 2012 का चुनाव भी दुर्गापाल ने टिकट न मिलने पर कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय होकर लड़ा था। वर्ष 2017 में चुनाव हारने के बावजूद दुर्गापाल को इस बार भी टिकट की उम्मीद थी और वो पिछले काफी दिनों से सक्रिय भी थे। इसी सीट पर हरेंद्र बोरा भी टिकट की दौड़ में थे। निर्दलीय के रूप में मजबूत प्रदर्शन कर रहे बोरा को प्रीतम सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ज्वाइन कराया था। 
इसी प्रकार कालाढुंगी सीट पर महेश शर्मा भी प्रीतम के कार्यकाल में कांग्रेस में शरीक हुए थे। निर्दलीय के रूप में अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे बोरा और शर्मा इस बार भी अधिकृत टिकट से महरूम रह गए। गढ़वाल मंडल में ऋषिकेश सीट पर जयेंद्र रमोला को टिकट मिलने से पूर्व काबीना मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण के समर्थक सदमें में हैं। पूर्व में बगावत कर चुनाव लड़े शूरवीर भी कुछ समय पहले ही कांग्रेस में दौबारा लौटे थे।