उत्तराखंड HC: नैनीताल के बलियानाले में हुए भूस्खलन पर कोर्ट में हुई सुनवाई, किस बात पर कोर्ट ने कहा उत्तर के साथ फ़ोटो भी करो पेश ताकि हकीकत सामने तो आये,जानिए खबर के लिंक में

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल के बलियानाले में हो रहे भूस्खलन पर दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई की। पूर्व के आदेश पर आज सैकेट्री डिजास्टर मैनेजमेंट एस. ए. मुरुगेशन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार से जियोलॉजिकल सर्वे कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के साथ ही याचिकाकर्ता से सैकेट्री द्वारा दायर शपथपत्र पर अपना जवाब और सबूतों को तीन सप्ताह में पेश करने को कहा है। खण्डपीठ ने अगली सुनवाई हेतु 29 दिसम्बर की तिथि नियत की है ,साथ मे सैकेट्री मैनेजमेंट से भी कोर्ट में उस दिन पेश होने को कहा है । सैकेट्री मैनेजमेंट ने शपथपत्र पेश कर कहा कि उन्होंने 2018 में हाई पावर कमेटी द्वारा दिये गए सुझाओ में से कई सुझाव पर कार्य कर दिया है,जैसे सिचाई विभाग ने नाले व उसके आसपास सुरक्षा दीवार बना दी है, वन विभाग ने भूस्खलन को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के पेड़ लगा दिए है और जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र के लोगो को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है। सरकार ने नाले के ट्रीटमेंट के लिए 20 करोड़ रुपया सिंचाई विभाग को अवमुक्त किया जा रहा है। नाले का ट्रीटमेंट कर रही जैपनीज कम्पनी से ठेका वापस लेकर पुणे की कम्पनी को ठेका दे दिया है।  सैकेट्री द्वारा कोर्ट को यह भी बताया गया कि भूस्खलन में उनके दो लैंड स्लाइड अलार्मिंग सिस्टम बह गए है इनको भी फिर से लगाया जा रहा है। इस शपथपत्र का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता द्वारा कोर्ट को बताया गया कि स्थल पर कोई कार्य नही हुआ है यह शपथपत्र एक कमरे में बैठकर बनाया गया है, जिस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इसका उत्तर फोटोज के साथ पेश करें, ताकि कोर्ट को हकीकत का पता चल सके।  
                          आपको बता दे नैनीताल निवासी अधिवक्ता सैय्यद नदीम मून ने 2018 में उच्च न्यायालय में जनहित दायर कर कहा था कि नैनीताल के आधार कहे जाने वाले बलियानाले में हो रहे भूस्खलन से नैनीताल व इसके आसपास रहे लोगों को बड़ा खतरा हो सकता है। नैनीताल के अस्तित्व और लोगों को बचाने के लिए इसमे हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय किया जाए। ताकि क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन को रोका जा सके।