उत्तराखंड:खाओ तो चावल न खाओ तो भी चावल!राशनकार्ड धारक सिर्फ चावल मिलने से हो रहे है उदास,गरीब कब तक चावल पर दिन गुजारे,रोटी को तरस गए

मोदी सरकार ने देश के गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए यूं तो कई तरह की योजनाएं चलाई है,लेकिन उन योजनाओं का लाभ कितना मिलता है ये सोचनीय विषय है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत मोदी सरकार ने देश के करोड़ो लोगो को सस्ते में और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो को फ्री में अनाज देने की स्कीम चलाई। अब सरकार ने इस योजना के तहत मिलने वाले गेहूं को बिल्कुल ही बंद कर दिया है। यानी खाओ तो चावल न खाओ तो भी चावल ही आपको लेने पड़ेंगे। 
राशनकार्ड धारकों को गेहूं नहीं दिया जाएगा। अब तक लाभार्थी को फ्री राशन योजना के तहत 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल दिया जाता था। लेकिन खाद्य और रसद विभाग के नए आदेश के अनुसार इस बार गेहूं की जगह लाभार्थी को सिर्फ 5 किलो चावल दिए जाने का निर्णय लिया गया।

बताया जा रहा है कि इस साल राज्य में गेहूं की पैदावार कम हुई है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार गेहूं की जगह 55 लाख मैट्रिक टन चावल का अतिरिक्त आवंटन किया गया। गेहूं की कम खरीद होने की वजह से सरकार ने राशन के कोटे में गेहूं की मात्रा कम करने का फैसला लिया।
इस बदलाव से यूपी ,केरल ,बिहार उत्तराखंड ,गुजरात ,झारखंड ,दिल्ली ,एमपी ,पक्ष्चिम बंगाल के गेहूं के कोटे में कमी की गयी है। इन राज्यों में कार्ड धारकों को गेहूं कम (कहीं पर गेहूं बिल्कुल बंद)और चावल अधिक दिया जायेगा। बाकि बचे हुए अन्य राज्यों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्यय विभाग ने मंत्रालय से कहा था कि या तो सितंबर में इस योजना को बंद कर दें या सरकार की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए कर में बड़ी कटौती करें।

आपको याद होगा अपने बजट 2022 के भाषण के दौरान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 23 के लिए खाद्य सब्सिडी बिल को पिछले साल के 2.86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 2.07 लाख करोड़ रुपये कर दिया था. सितंबर तक, भारत का सब्सिडी बिल बजट से बढ़कर 2.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. ईटी ने कहा कि अगर यह 6 महीने और चलता है, तो बिल बढ़कर 3.7 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है.