राष्ट्रपति चुनाव! देश के प्रथम नागरिक और 15वें राष्ट्रपति के लिए डाले जा रहे है वोट!कैसे चुना जाता है राष्ट्रपति?वो कौन थे जो निर्विरोध चुने गए थे राष्ट्रपति?क्या होती है हर राज्य की अलग वोट वैल्यू ? जानिए दिलचस्प जानकारी

आज भारत मे देश के प्रथम नागरिक और 15वें राष्ट्रपति पद का चुनाव हो रहा है। देश के तमाम निर्वाचित सांसद और विधायक अपना कीमती वोट देकर किसे चुनते है ये आज वोट पिटारे में कैद हो जाएगा। राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए की ओर से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की ओर से यशवंत सिन्हा प्रत्याशी है। 
द्रौपदी मुर्मू का नाम भले ही कई लोगो के लिए नया हो और यशवंत सिन्हा एक जाना पहचाना चेहरा हो लेकिन रुझान द्रौपदी मुर्मू की ओर जाते ही दिखाई दे रहे है। 
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्करसिंह धामी ने भी अपना वोट दे दिया है। हाल ही में द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड का दौरा किया था। द्रौपदी मुर्मू को बसपा,वाईएसआरसीपी,बीजद,तेदेपा, अन्नाद्रमुक, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, झामुमो इत्यादि का समर्थन मिला है। अगर द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनती है तो वो पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी। 
राष्ट्रपति पद पर चुनाव किस तरह होते है आइये अब एक नज़र डालते है इस महत्वपूर्ण विषय पर।
राष्ट्रपति का निर्वाचन इलेक्टोरल कॉलेज के द्वारा किया जाता है। इन इलेक्टोरल कॉलेज निर्वाचक मंडल के सदस्य होते हैं लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य और इसके अलावा सभी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।चूंकि विधान परिषद् के सदस्य उसके सदस्य नहीं होते. लोकसभा और राज्यसभा के नामांकित सदस्य भी इसके सदस्य नहीं होते हैं।
राष्ट्रपति चुनाव में विधायकों और सांसदों की अलग अलग वोट वैल्यू होती है ,जी हाँ! भारत मे कोई राज्य बड़ा है तो कोई राज्य छोटा है इसी हिसाब से वहां के विधायकों की वोट वैल्यू तय होती है। विधायकों और सांसदों के वोट की वैल्यू 1971 की जनगणना के आधार पर तय होती है। किसी राज्य के विधायक के पास कितने वोट हैं, इसका पता लगाने का एक फॉर्मूला होता है।
इसके लिए राज्य की आबादी को राज्य के विधायकों की संख्या से भाग दिया जाता है।इसके बाद जो संख्या आती है, उसे 1000 से भाग दिया जाता है।फिर जो संख्या मिलती है, वही विधायकों की वोट की वैल्यू होती है। हर राज्य के विधायकों की वोट की वैल्यू अलग-अलग होती है।
जैसे उत्तरप्रदेश में विधायकों की वोट वैल्यू सबसे ज्यादा है,तो वही सिक्किम में कम। इसको समझने के लिए थोड़ा गुणा भाग करते है। उत्तरप्रदेश में 403 विधायक है हर विधायक के वोट वैल्यू 208 है,अब कुल विधायक गुना 208 यानी 83,824 उत्तरप्रदेश की वोट वैल्यू होगी। सिक्किम में वोट वैल्यू केवल 7 है।

 देश के सर्वोच्च नागरिक का चुनाव आम चुनावों की तरह गोपनीय तरीके से होता है।राष्ट्रपति चुनाव में ईवीएम तो नहीं लेकिन बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। अगर किसी राजनीतिक दल को यह पता चल जाए कि उसका कोई सदस्य पार्टी की इच्छा के विरुद्ध वोट कर रहा है तो दल अपने सदस्य के खिलाफ व्हिप जारी नहीं कर सकते.
 लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को जहां हरे रंग के मतपत्र दिए जाएंगे, वहीं विधायकों को गुलाबी रंग के मतपत्र मिलेंगे. 

पूरी कार्यपालिका की शक्तियां राष्ट्रपति के हाथ में होती है. राष्ट्रपति इनका प्रत्यक्ष तौर पर स्वयं या फिर अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से इस्तेमाल कर सकते हैं.

राष्ट्रपति का प्रमुख दायित्व प्रधानमंत्री को नियुक्त करना और संविधान का संरक्षण करना है. यह काम कई बार वो अपने विवेक से तय करते हैं. कोई भी अधिनियम उनकी मंजूरी के बिना पारित नहीं हो सकता. वो मनी बिल को छोड़कर किसी भी बिल को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।
आइये अब कम शब्दों में जानते है इस बार राष्ट्रपति पद के लिए खड़े प्रत्याशियों के बारे में।

 

यशवंत सिन्हा- विपक्ष- 6 नवंबर 1937 को पटना के कायस्थ परिवार में जन्म हुआ था यशवंत 1960 में आईएएस बने, करीब 24 साल तक इस सेवा में रहे। 1984 में आईएएस के पद से इस्तीफा दिया और राजनीति में आ गए। जनता पार्टी से शुरुआत की और फिर बीजेपी में आ गए। 1998, 1999 और 2009 में हजारीबाग से बीजेपी सांसद रहे। नवंबर 1990 से जून 1991 तक चंद्रशेखर की सरकार में वित्त मंत्री रहे, 2018 में बीजेपी छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।

 


द्रौपदी मुर्मु, एनडीए-20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में जन्म हुआ था।  वो आदिवासी संथाल परिवार से ताल्लुक रखतीं हैं। उन्होंने श्याम चरण मुर्मू से शादी की है,उन्होंने एक टीचर के रूप में करियर शुरू किया,फिर क्लर्क की नौकरी की. 1997 में पार्षद बनीं।  2000 और 2009 में मयूरभंज की रायगंज सीट से दो बार विधायक बनीं।  मई 2015 में झारखंड की राज्यपाल बनीं। 

भारत मे अब तक 14 राष्ट्रपति रहे है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से पहले देश में 13 राष्ट्रपति रहे।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद (जन्म-1884, निधन-1963)
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जन्म-1888, निधन-1975)
डॉ. ज़ाकिर हुसैन (जन्म-1897, निधन-1969)
वराहगिरी वेंकट गिरी (जन्म-1894, निधन-1980)
डॉ. फ़ख़रुद्दीन अली अहमद (जन्म-1905, निधन-1977)
निलम संजीव रेड्डी (जन्म-1913, निधन-1996)
ज्ञानी जैल सिंह (जन्म-1916, निधन-1994)
आर वेंकटरमन (जन्म-1910, निधन-2009)
डॉ. शंकर दयाल शर्मा (जन्म-1918, निधन-1999)
के आर नारायनन (जन्म-1920, निधन-2005)
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (जन्म-1931, निधन-2015)
प्रतिभादेवी सिंह पाटिल (जन्म-1934)
प्रणब मुखर्जी (जन्म-1935, निधन-2020)
रामनाथ कोविंद (जन्म-1945)।
इनमें से नीलम संजीव रेड्डी अकेले राष्ट्रपति हुए जो निर्विरोध चुने गए थे और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद अकेले राष्ट्रपति थे जो दो बार चुने गए।