नैनीताल:माँ नंदा सुनंदा की मूर्तियों की ब्रह्ममुहूर्त में हुई प्राण प्रतिष्ठा,भक्तों में माँ के दर्शन को लेकर ख़ुशी की लहर

सरोवर नगरी नैनीताल में आज से माँ नंदा देवी महोत्सव का आगाज हो गया है और आज ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा सुनंदा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कर दर्शन के लिए खोल दिया गया। सुबह से ही मां के मंदिर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। वही कोविड को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तेज है और भक्तो को कोविड नियमो के तहत दर्शन करवाए जा रहे हैं।
 कुमाउं की कुलदेवी मां नंदा-सुनंदा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज यानि अष्टमी के दिन अपने मायके आगमन हुआ है,और इसी परंपरा के तहत एकादशी 17 सितंबर को कुलदेवी मां नंदा-सुनंदा अपने ससुराल लौट जाएंगी।नैनीताल में इन दिनों मां नंदा-सुनंदा के दर्शनों के लिए भक्तों का ताता लगा हुआ है।
 कुल देवी मां नंदा-सुनंदा आज अपने ससुराल से अपने मायके यानी कुमाउं की धरती पर पधार गईं हैं नैनीताल के मां नयना देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं को भक्तों के दर्शनों के लिये खोल दिया गया है मां नंदा-सुनंदा के दर्शनों के लिये आज सुबह 3 बजे से नैनीताल के मां नयना देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है।बड़ी संख्या में भक्त अपनी कुल देवियों के दर्शनों को पहुंच रहे हैं, इससे पहले सबुह 2 बजे से माॅ की पूजा अर्चना शुरू हो गई थी जिसके बाद से ही मंदिर में भक्तो का तांता लगना भी शुरू हो गया है।
आपको बता दें कि मां नंदा-सुनंदा को कुमाउं में कुल देवी के रूप में पूजा जाता है चंद राजाओं के दौर में मां नंदा-सुनंदा को कुल देवी के रूप में चंद राजा पूजा करते थे और अब संपूर्ण कुमाउं क्षेत्र के लोग मां नंदा-सुनंदा को कुल देवी के रूप में पूजते हैं।ऐसा माना जाता है कि मां नंदा और सुनंदा साल में एक बार अपने मायके यानी कुमाउं में आती हैं और यही कारण है कि अष्टमी के दिन यानी आज कुमाउं के विभिन्न स्थानों पर मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमा तैयार कर प्राण प्रतिष्ठा के बाद समझा जाता है कि मां नंदा-सुनंदा अपने मायके पहुंच गई हैं।मां नंदा-सुनंदा की अगले तीन दिनों तक कुमाउं के लोग उपासना करेंगे और 17 सितंबर को भव्य डोला भ्रमण मंदिर परिसर में करवाने के बाद मां नंदा-सुनंदा का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा।विसर्जन की यह परंपरा उस तरह है जिस तरह से लोग अपने बेटी को ससुराल को विदा करते है,उसी तरह से मां नंदा-सुनंदा को मायके नैनीताल से ससुराल विदा करने की परंपरा भी है।