नैनीताल : राजनैतिक रैलियों में जुटने वाली भीड़ से कोरोना का खतरा नहीं होता बल्कि नंदा सुनंदा देवी के डोले के नगर भ्रमण से कोरोना का ख़तरा होगा, अजीब दोगलापन है!

119 वें माँ नंदा देवी महोत्सव का शुभारंभ शनिवार को बड़े धूमधाम से हुआ,ढोल नगाड़ों के साथ छोलिया नृत्य के साथ श्री राम सेवक सभा से कदली वृक्ष लाने के किये दल रवाना हुआ।ऐतिहासिक माँ नंदा देवी महोत्सव हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन पिछले साल कोरोना संक्रमण की वजह से ये महोत्सव बेहद सादगी के साथ मनाया गया।भक्तों को माता के दर्शन वर्चुअल रूप से करवाये गए।कोरोना गाइडलाइंस के अनुसार मंदिर प्रांगण में भक्तों का जाना प्रतिबंध था,इस वर्ष भी नंदा देवी महोत्सव के दौरान लगने वाले मेले पर प्रतिबंध लगाया है लेकिन मंदिर परिसर के अंदर श्रद्धालुओं को प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सीमित संख्या में दर्शन हेतु जाने दिया जाएगा।इस पर कई लोगो ने आपत्ति जताई है।भक्तों का कहना है कि अभी हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नैनीताल दौरे पर आए थे तब बेहिसाब भीड़ ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, तब कोरोना का खतरा नही मंडराया? लेकिन माँ के भक्तों के लिए सारे नियम कानून बना दिये गए है जो कि आस्था के साथ खिलवाड़ है।पिछले साल भी भक्तों को माता के दर्शन नही हो पाए इस वर्ष भी जिला प्रशासन ने डोला,धार्मिक अनुष्ठान इत्यादि में प्रतिबंध लगा दिया है।क्या केवल धार्मिक आयोजन पर ही कोरोना की गाइडलाइंस थोपी जाएंगी? कोई भी राजनीतिक दल जब रैली करता है तो भीड़ धार्मिक आयोजन में लगने वाली भीड़ से भी ज़्यादा इक्कठी होती है।जिला प्रशासन के द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर श्रद्धालुओं में खासी नाराज़गी व्याप्त हो गयी है और उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की  है कि नंदा सुनंदा देवी के डोले को नैनीताल भ्रमण की अनुमित दी जाए।