नैनीताल: ग्रीन बेल्ट में हरे भरे पेड़ो का कटान कर हो रहा है भारी निर्माण कार्य, सरकारी तंत्र सहित हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की उड़ रही है धज्जियां

सरोवर नगरी नैनीताल में ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। नैनीताल के अति संवेदनशील क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट अयार पाटा नैनी रिट्रीट होटल के बगल में भारी भरकम निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी शिकायत कई बार सभासद मनोज साह जगाती द्वारा सीएम पोर्टल,जिला प्रशासन, प्राधिकरण ,नगर पालिका इत्यादि को की गई लेकिन यहां हो रहे निर्माण कार्य को अब तक नही रोका गया। आलम ये हो रहा है कि हरे भरे पेड़ो को भी धड़ाधड़ काटा जा रहा है।


जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की कार्यवाही के नाम महज खाना पूर्ति ही होती रही है। हाल ही में नगर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में अतिक्रमण और अवैध निर्माण को चिन्हित भी किया गया था,जनाक्रोश भड़कने के बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम के एमडी और वर्तमान डीएम धीराज गर्ब्याल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी टीम का गठन किया गया लेकिन फिर बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
अयार पाटा सभासद मनोज साह जगाती ने सीएम पोर्टल में नैनी रिट्रीट्स के समीप हो रहे निर्माण कार्य की शिकायत के बाद सरकारी जवाब को दिखाया जिसमे लिखा है कि  नैनी रिट्रीट होटल के समीप 3 आरसीसी कॉलम कॉस्ट किये जाने व प्रश्नगत स्थल के विशेष वनाच्छादित क्षेत्र के अंतर्गत होने व किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य अनुमन्य ना होने के दृष्टिगत अवैध निर्माण के विरुद्ध संस्थित करते हुए कार्य रुकवाया गया है विपक्षी को स्थल पर किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य ना किए जाने के हिदायत दी गई है वाद कार्यवाही विचाराधीन है।
इसके बावजूद भी वहां लगातार भारी निर्माण कार्य जारी है और पेड़ो का कटान कर सरकारी तंत्र को खुलेआम चुनौती दी जा ही है।
गौरतलब है कि 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल निवासी पर्यावरणविद प्रो अजय रावत की जनहित याचिका पर नैनीताल में ग्रुप हाउसिंग के साथ ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया था,प्रो अजय रावत की याचिका पर हाईकोर्ट ने भी ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में अवैध निर्माण कार्य पर कार्यवाही के निर्देश दिए थे,लेकिन आज यहां न तो हाईकोर्ट के ही निर्देशो का पालन हो रहा है न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का।
इस मामले में प्रो अजय रावत ने कहा कि नैनीताल शहर में जगह जगह अवैध निर्माण कार्य चल रहा है,जो नैनीताल को सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से वन विभाग और जिला प्राधिकरण का उदासीन रवैया प्रदर्शित करता है।उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग और ग्रीन बेल्ट के निर्माण कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है, डीएन गोधावर्धन  अगेंस्ट यूनियन ऑफ इंडिया (DN Godhawardhan against union of india)उसमे कोर्ट ने डिसीजन दिया कि एक हज़ार मीटर की ऊंचाई के ऊपर निर्माण कार्य ग्रीन सेलिंग नही होगी जबकि नैनी झील की ऊंचाई 1938 है जो कि कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई ऊंचाई से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने ये भी कहा कि प्राधिकरण छोटे मकानों पर तो एक्शन लेता है लेकिन बड़े मकानों पर कोई कार्यवाही नही की जाती। उन्होंने ये भी कहा इन भारी निर्माण कार्यो से पूरे नैनीताल को खतरा है इस ओर जिला प्रशासन, नगर पालिका, प्राधिकरण,पर्यावरण प्रेमी सभी ने चुप्पी साध रखी है।