सावधान ! कोरोना और डेंगू के साथ अब देश में जीका वायरस फैला रहा है दहशत

देश में जारी कोरोना और डेंगू के प्रकोप के बीच जीका वायरस नामके एक नई बीमारी ने देश के स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई देशों में दहशत फैलाने के बाद अब जीका वायरस ने भारत में भी दस्तक दे दी है। कोरोना और डेंगू से जूझ रहे देश के सामने अब जीका वायरस नाम की बीमारी चुनौती बनती नजर आ रही है। देश के कई अलग अलग राज्यों में जीका वायरस अपना आतंक बरपा रहा है। अलग अलग राज्य में कोरोना और डेंगू के बाद जीका वायरस के केस सामने आए है। खबरों की मानें तो केरल, उत्तरप्रदेश, गुजरात, दिल्ली के साथ अन्य राज्यों में जीका वायरस संक्रमित पाए गए है। 

आए आपको बता हैं आखिर क्या है जीका वायरस 


डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की ही तरह जीका भी मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारी है। जो डेंगू फैलाने का कारक माना गया है। दरअसल, जीका वायरस फ्लाविविरिडए वायरस फैमिली का होता है। जब एडीस मच्छर काटते है तो सलाइवा और सीमेन जैसे तरल पदार्थ के आदान-प्रदान से संक्रमन फैलता है। इंसांन के खून में इसका संक्रमण पाया जाता है। यदि गर्भवती महिला को काट ले तो जन्म लेने वाले बच्चे में माइक्रोसेफली या अन्य जन्मजात समस्याएं हो सकती है। जीका का पहला मामला अफ्रीका में साल 1947 में सामने आया था लेकिन जीका के केसेज उस वक्त सुर्खियों में आए जब साल 2015 में ब्राजिल में जीका का कहर देखने को मिला और देखते ही देखते यह माहमारी भारत तक पहुंच गई। वैसे तो जीका वायरस एडीज मच्छर से फैलता है लेकिन यह प्रभावित व्यक्ति के साथ सेक्शुअल संपर्क बनाने की वजह से भी फैल सकता है। साल 2016 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन WHO ने जीका को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था। गर्भवती महिलाओं के साथ ही होने वाले बच्चे पर भी जीका का खतरा अधिक बना रहता है। डेंगू की ही तरह जीका का भी पहला और सबसे अहम लक्षण है बुखार। हालांकि इसे तुरंत डायग्नोज करना बेहद मुश्किल है। बहुत से मरीज इसे फ्लू के लक्षण समझ लेते हैं और उन्हें पता ही नहीं होता कि वे जीका से संक्रमित हो चुके हैं जिस वजह से इलाज में देरी होती है और मौत का खतरा बढ़ जाता है। 

क्या बरतें सावधानी


यदि व्यक्ति जीका वायरस से संक्रमित पाया गया है तो 14 दिनों तक उसे बल्ड डोनेट करने से बचना चाहिए। जीका वायरस से बचना है तो घर में मच्छरों की एंट्री पर रोक लगाने के उपाय करना चाहिए. इनमें मच्छरदानी व अन्य मच्छर भगाने वाले उपाय शामिल है। सीडीसी में रिपोर्ट के मुताबिक जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति को शारिरीक संबंध बनाने से बचना चाहिए। 

जीका वायरस के लक्षण


जीका वायरस के लक्षण डेंगू, चिकनगुनिया से मिलते-जुलते है। इस दौरान फीवर आना, त्वचा में लाल चकत्ता होना, ज्वाइंट्स में असहनिय दर्द व अन्य शामिल है। 
नार्मल मरीज 2 से 7 दिनों तक प्रभावित रह सकता है। इससे ठीक होने में 3-14 दिन का समय लग सकता है इस दौरान व्यक्ति को तेज बुखार आ सकता है। शरीर के विभिन्न हिस्सों में लाल चकत्ते पड़ सकते हैकाफी ज्यादा थकान महसूस हो सकता है। सिर में तेज दर्द उठ सकता हैमांसपेशियों व जोड़ों में असहनिय दर्द हो सकता है यदि गर्भवती महिलांए इससे संक्रमित होती हैं तो बच्चे जन्‍म के समय आकार में छोटे और अविकसित दिमाग वाले हो सकते है साथ ही साथ बच्चे किसी बीमारी के साथ भी जन्म ले सकते है। 

जीका वायरस से बचाव के उपाय


यूएस सीडीसी के अनुसार जीका वायरस का अबतक कोई सटिक दवाई मौजूद नहीं है। ऐसे में घर में मच्छरों से बचाव के उपाय करने चाहिए. अगर फिर भी इससे संक्रमित होते हैं तो भरपूर आराम करना चाहिए। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए प्रचूर मात्रा में तरल पदार्थ या पानी पीते रहना चाहिए। फीवर और दर्द को समाप्त करने के लिए डॉक्टर की सलाह से एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल) का सेवन करना चाहिए और अपने मन से एस्पिरिन व अन्य दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

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